Maharani Diwan Jarmani Das Hindi | रानियों की हैरान करने वाली रंगीन कहानियां

 Maharani Diwan Jarmani Das Hindi (रानियों की हैरान करने वाली रंगीन कहानियां)

हेल्लो दोस्तों केसे हो आप सब आज आपका परिचय एक ऐसी किताब से करवाने जा रहे हैं जिसे देखकर आप सच में रोमांच से भर जाएंगे।राजा रानियों की किस्से कहानयां तो हम सब ने सुन रखी है। बहुत सी ऐतिहासिक कहानियां हमें स्कूल में ही पढ़ाई जाती थी लेकिन इनसे भी बढ़कर बहुत सी कहानियां इतिहास में ही दफन हो गई या यूं कहें कि कभी बाहर ही नहीं आई दबा दी गईं। यह किताब Maharani Diwan Jarmani Das Hindi में उपलब्ध है जिसमें हिन्दुस्तानी रानी महारानी की अतरंग जिंदगी से जुड़े हैरत अंगेज किस्से दर्ज हैं।

दीवान जरमनी दास की इस चर्चित किताब “महारानी” में आपको हिंदुस्तान के प्रसिद्ध राजघरानों की रानी, महरानियों के कुछ ऐसे ही रोचक दिलचस्प किस्से पढ़ने को मिलेंगे जो आज से पहले आपने ना तो कहीं पढ़ें हैं नहीं सुने Maharani Diwan Jarmani Das Hindi  रानियों की हैरान करने वाली रंगीन कहानियां

हेल्लो दोस्तों केसे हो आप सब आज आपका परिचय एक ऐसी किताब से करवाने जा रहे हैं जिसे देखकर आप सच में रोमांच से भर जाएंगे।राजा रानियों की किस्से कहानयां तो हम सब ने सुन रखी है। बहुत सी ऐतिहासिक कहानियां हमें स्कूल में ही पढ़ाई जाती थी लेकिन इनसे भी बढ़कर बहुत सी कहानियां इतिहास में ही दफन हो गई या यूं कहें कि कभी बाहर ही नहीं आई दबा दी गईं। यह किताब Maharani Diwan Jarmani Das Hindi में उपलब्ध है जिसमें हिन्दुस्तानी रानी महारानी की अतरंग जिंदगी से जुड़े हैरत अंगेज किस्से दर्ज हैं।

दीवान जरमनी दास की इस चर्चित किताब “महारानी” में आपको हिंदुस्तान के प्रसिद्ध राजघरानों की रानी, महरानियों के कुछ ऐसे ही रोचक दिलचस्प किस्से पढ़ने को मिलेंगे जो आज से पहले आपने ना तो कहीं पढ़ें हैं नहीं सुने हैं।

Introduction Of Maharani Book

लेखक की पूर्व में राजा महाराजाओं से जुड़ी “महाराजा” नाम से पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है जो बेस्ट्सेलर रही हैं “महारानी” में सिर्फ रानी,महारानियो से जुड़े अनकहे वृतांत का वर्णन किया गया है।

महारानी उस समय का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण के साथ साथ ऐतिहासिक रोमांटिक घटनाओं का दस्तावेज है जिसमें भारतीय महारानियो,शाही प्रेमिकाओं की भारतीय व यूरोप की राजसी लाईफ स्टाइल,उनकी इच्छाओं, कुंठाओ,प्रेम कहानियों की सच्ची दास्तानों की झलक दिखाई गई है जिसमें उस समय की साजिशे विस्तार से दर्ज की गई है।

Who Are Diwan Jarmani Das (दीवान जर्मनी दास कोन है)

दीवान जर्मनी दास का जन्म 1895 में पंजाब में हुआ था और वह कपूरथला व पटियाला रियासत में मिनिस्टर रहे थे मिनिस्टर को आम भाषा में “दीवान” कहा जाता है।

लेखक ने विभिन्न राजघरानों में लगभग 50 साल तक अपनी सेवाएं दीं और जब भी ये राजा महाराजा राजनीतिक या नितांत “व्यक्तिगत” विदेश यात्राओं पर विदेश गए लेखक इन यात्रियों में इनके साथ रहे।

राजा महारजाओं, महारानियों,राजकुमारियों की अपार धन दौलत और शानोशौकत और चमक दमक भरी शानदार जिंदगी में सतह के नीचे चलने वाली रंगीनमिजाजी भरे अनगिनत लम्हों के साक्षी रहे।

राजसी महिला मित्र (royal girlfriends)

पुस्तक में लेखक खुद स्वीकार करतें हैं कि महारानियां,राजकुमारियों व राजसी,कुलीन महिलाओं से ओपचारिक व व्यक्तिगत सदैव बहुत मित्रतापूर्ण सम्बन्ध रहे हैं।

लेखक के ब्राजील,चिली,पेरू,अमेरिका,लगभग समस्त यूरोपीय देशों और विशेषकर तुर्की,सीरिया,मिश्र,अल्जीरिया,जापान,चीन,इंडोनेशिया,कंबोडिया,थाईलैंड जैसे देशों व भारत के विभिन्न रियासतों की महिलाओं से उनके बहुत अच्छे सौहार्दपूर्ण रिश्ते रहे थे।

भाषाएं और सम्मान ( prizes)

जर्मनी दास की अंग्रेजी,फ्रेंच,उर्दू पर बहुत अच्छी पकड़ थी पंजाबी तो उनकी मात्र भाषा थी ही।
समय समय पर जर्मनी दास को स्पेन,मोरक्को,फ्रांस,मिश्र समेत कई देशों की सरकारों द्वारा बड़े बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया साथ ही भावलपुर,कपूरथला व पटियाला जैसी रियासतों ने भी उन्हें पदवियां व सम्मान प्रदान किए।

रानियों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था( burdens on queens)

बड़े बड़े सम्राट,निजाम और महाराजा अपने बड़े-बड़े जनानखाना और रनिवासो पर किस प्रकार कंट्रोल किया करते थे यह जानकारी भी काफी रोमांचक है क्योंकि उनकी रानियों की संख्या 100 से लेकर 500 तक हुआ करते थे जिसकी निगरानी लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली बनाई हुई थी।

रनिवास की औरतों को बाहर निकलने पर कड़ी पाबंदी थी।
तुर्की के सुल्तान हरम की पहरेदारी में हिजड़े तैनात किया करते थे हिजड़ों का प्रमुख महामंत्री के समकक्ष माना जाता था उसकी कमान में महिला सैनिकों की गार्ड लगाई जाती थी ।

इनकी जासूसी प्रणाली भी बहुत मजबूत थे किसी भी औरत या रानी पर शक होते ही शिकायत “हिजड़ा प्रमुख” तक पहुंचा दी जाती थी और इसका दंड भी बहुत कड़ा होता था कई बार तुम मृत्युदंड भी।

मुगल बादशाह और तुर्की के सुल्तानों के घर में तो एक अलग ही तरीका अपनाया जाता था हरम की औरतों को एक विशेष तरह का भोजन दिया जाता था जिससे उनके मन में कम से कम कामवासना पैदा हो और इसके अलावा ऐसी व्यवस्था कर रखी थी कि 5 साल से बड़ी उम्र का कोई भी लड़का हरम में ना जाने पाए चाहे वह किसी रानी महारानी का नजदीकी रिश्तेदार ही क्यों ना हो।Maharani Diwan Jarmani Das Hindi

रानियों के दिलचस्प किस्से (Raniyon Ke Rangeen Kisse)

Maharani Diwan Jarmani Das Hindi 
Maharani Diwan Jarmani Das Hindi

 

रंगीन मिजाज विधवा इंदिरा महारानी ( Vidhwa indira Maharani)

कूचबिहार के महाराज जितेंद्र नारायण की शादी बड़ौदा के महाराज की बेटी राजकुमारी इंदिरा राजा के साथ हुई थी इनकी एक पुत्र पुत्री हुई पुत्री का नाम गायत्री देवी रखा गया था जिनकी शादी जयपुर के महाराज सवाई मानसिंह के साथ हुई ।

महारानी इंदिरा राजा पर पश्चिमी सभ्यता का बहुत प्रभाव था और वह यूरोप और अमेरिका की यात्राओं पर जाती रहती थी पति के गुजरने के बाद महारानी रीजेंट के रूप में इंग्लैंड गई वहीं उनका पुत्र अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था यह एक बहाना था जिस की ओट में वह लंदन जाया करती थी।

वैसे भी कूचबिहार राज परिवार के अधिकांश सदस्य अंग्रेजियत के गुलाम थे महारानी इंदिरा राजा ब्रिटेन के उच्च वर्ग में बहुत घुली मिली हुई थी और वहां बहुत से लोग उस पर जान छिड़कते थे ।महारानी इंदिरा राजा शराब की बहुत बड़ी शौकीन थी और हर समय मदमस्त रहा करती थी लंदन में बहुत बार खुद लेखक ने उन्हें मौज-मस्ती हालत में देखा था।

एक शाम लेखक ने उन्हें अपने एक अंग्रेज दोस्त की बाहों में लिपटे हुए सीढ़ियों पर बैठा देखा लेखक के अनुसार वह आज तक जितनी भी औरतों से मिले महारानी इंद्रा राजा उन सब में सुंदर थी इसलिए उनके इतने चाहने वाले देखकर भी कोई आश्चर्य की बात नहीं थी।

सेक्स पावर के लिए प्रार्थना (prayer for sexpower)

लेखक एक दिलचस्प वाक़ए का जिक्र करते हैं की केसे एक महाराजा अपनी रानी या रखेल के साथ सोने से पहले मर्दाना ताकत के लिए प्रार्थना किया करते थे और यदि रात में उनकी कामक्रीड़ा सफल रहती तो वह अपने नौकरों कर्मचारियों को इनाम देते थे रानी को गहने,जवाहरात देकर खुशी मनाते और किस तरह सभी नोकर चाकर ऐसी शुभ रात्रियों का बेसब्री से इंतजार करते।

रानी को तलाक और मोहम्मद अली जिन्ना (Rani Ko Talak Our Mohammad Ali jinnah)

लंदन के एक होटल में एक महाराजा को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह हो जाता है रानी के लाख सफाई देने के बावजूद महाराजा उसे तलाक देने पर अड जा ते हैं।

उसी होटल में “मोहम्मद अली जिन्ना” रुके हुए थे जो लेखक के अच्छे मित्र और प्रसिद्ध वकील थे उन्होंने भी महाराज को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह अपने निर्णय से तस से मस नहीं हुए आखिरकार रानी को गुजारा भत्ता देने की बात पर तलाक दिया गया।
मोहम्मद अली जिन्ना लेखक के अच्छे मित्र थे और उनकी पत्नी की पेरिस में रहने समेत अन्य व्यवस्थाएं दीवान जर्मनी दास करते थे।

हैदराबाद का नवाब और महारानी इंदिरा (Hedrabaad Ka Nawab)

हैदराबाद का नवाब कुसरोजंग भी महारानी इंदिरा राजा का एक चाहने वाला था नवाब महारानी को प्यार से “महबूब” कहकर पुकारा करता था लेखक एक वाक्य का जिक्र करते हैं कि 1 दिन नवाब खुसरो जंग ने मुझे फोन पर कहा कि इंदिरा उसके साथ है और मुझे भी वहां बुलवाया है ।

दीवान ने बहाना बनाकर टालना चाहा तभी टेलीफोन महारानी इंदिरा ने पकड़ा और मौज मस्ती वाले अंदाज में उसे अपने पास आने को कहा लेखक कहता है कि वह दोनों आपस में प्यार करने लगे थे और चाहते थे कि दुनिया भी उनके प्यार के बारे में जाने लेकिन नवाब ने थोड़े दिन बाद महारानी से दूरियां बनाकर एक पारसी लड़की से शादी कर ली।

जूनागढ़ की बेगम (Junagadh Ki Begum)

रानी महारानीयों की कई बातों के बारे में जानकर पाठकों को बहुत रोमांच होगा कि कई बार रानियां बुरी तरह वासना के वश में हो जाती थी और सारी सीमाएं तोड़ देती थी जूनागढ़ की बेगम एक बार अपनी किसी महिला सहायक के साथ काम क्रीड़ा में संलग्न थी उसी समय उनकी एक नौकरानी ने उन्हें ऐसा करते देख लिया।

नौकरानी ने यह बात महल के बाकी नौकरों को बता दी की बेगम अपनी सहायिका के साथ यह सब करती है यह सब सुनकर बेगम इतना ज्यादा नाराज हुई कि उस नौकरानी को सजा देने के लिए पहले तो बुरी तरह पिट गया हाथ पैर बंधवा कर फिर उसे नग्न करके अपने हाथों से उसके गुप्तांगों में मिर्ची डाली ।

नौकरानी बुरी तरह झटपटा रही थी और गुस्से से भरी बेगम उसका तड़पना देखती रही आखिरकार नौकरानी ने तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया बेगम ने मामला रफा-दफा करवाना चाहा लेकिन महल के दूसरे नौकरों ने शोर मचा दिया जिस पर आखिर लाहौर हाई कोर्ट में मुकदमा चला लेकिन बेगम ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर मुकदमा वापस करवा दिया।Maharani Diwan Jarmani Das Hindi

रानियों के प्रेमप्रसंग ( Affairs Of Queen’s)

अधिकतर राजा महाराजा अपने से कम उम्र की जवान लड़कियों से शादी किया करते थे और उन्हें अपनी महारानियां बनाते थे लेकिन इन लड़कियों को समय नहीं दे पाने का वह रानी या महारानी बहुत बार दूसरे पुरुषों और अपने युवा कर्मचारी व नौकरों की तरफ आकर्षित हो जाती थी।

इस तरह महारानीयों के अन्य पुरुषों से संबंध बन जाते थे। यह संबंध पक डे जाने के बाद महाराजा अपनी रानी महारानी तक को जेल में डाल देते थे बहुत से प्रेमियों की महाराजा खुद गोली मार देते थे और फिर उन्हीं की अंतिम यात्रा में सहानुभूति प्रकट करने शामिल भी होते थे जैसे कुछ पता नहीं कि क्या हुआ है।

जौहर (Queen’s Valorous Sacrifice)

चित्तौड़ के किले पर जीत के बाद जब अकबर ने चित्तौड़ किले में प्रवेश किया तो वह वहां के हाल देखकर भोंचका रह गया क्योंकि गढ़ के द्वार खोलने से पहले ही 8000 वीर राजपूतों ने पान का अंतिम बीड़ा मुंह में लिया और अपने अंतिम युद्ध करने के लिए निकल पड़े और उसके बाद गढ़ में बची हुई सभी महिलाओं और रानियों,राजकुमारियां यहां तक कि कइयों ने तो दूध मुंहे बच्चों को गोद में लिए अग्निकुंड में समाधि ले ली।

जहर खाया लाज न दी (Queen Eat Poison)

पुस्तक ऐसे लोम हर्शक वाकयों को भी अवगत कराती है कि कैसे रानियों ने आक्रांताओं से अपनी आबरू इज्जत बचाने के लिए सामूहिक रूप से जहर खाकर अपने प्राण त्याग दिया करती थी इसके लिए भी रानियां विशेष ड्रेस तेयार करवाती थी जिसमें जहर रखने के लिए गुप्त जेबें बनी होती थी।

मिर्जा इस्माईल (Mirja Ismail Koan Tha )

मिर्जा इस्माईल मैसूर रियासत का दीवान था जो पूरे अधिकार से सत्ता चलाता था उसे शहरों को खूबसूरत बनाने की बड़ी धुन थी वह जिस भी रियासत में रहा सुंदर सड़कें, बाग बगीचे,इमारतें बनवाया करता था जयपुर रियासत में वह प्रमोट होकर प्रधानमंत्री बना। यह जहां भी रहा अपनी जनविरोधी व तानाशाह छवि के कारण कभी जनता का चहेता नहीं बना।

जयपुर की इमारतों को गुलाबी रंग में रंगवाकर जयपुर को “गुलाबी नगरी” के रूप में संवारने व प्रसिद्ध करने में इन्हीं मिर्जा इस्माईल का संपूर्ण योगदान रहा है।

मुगल बादशाह की दुखभरी कहानी

लेखक ने पुस्तक में देसी भारतीय राजा महाराजा महारानी यों के अलावा यूरोप और अमेरिका की महारानीयों के बारे में भी चर्चा की है जैसे नेपोलियन की बेवफा प्रेमिका जोजफिम का वर्णन भी पुस्तक में आता है जो नेपोलियन के पदाधिकारी के प्रेम में पड़ गई थी जिसका नेपोलियन को बहुत सदमा लगा था।

“महारानी” की समीक्षा (Review Of Maharani)

लेखक दीवान जर्मनी दास ने जीवन के 50 वर्ष एक राजनयिक की हैसियत से देश की प्रभावशाली रियासतों में गुजारे हैं और एक राजदूत के रूप में असंख्य देशों में घूमे व देशी विदेशी राजघरानों और महलों में होने वाली छोटी बड़ी घटनाओं के स्वयं साक्षी रहे हैं ।

इसलिए लेखक कहीं कहीं आत्ममुग्ध दिखते हैं फिर भी उन के व्यक्तिगत नज़रिए को छोड़ भी दिया जाए तो राजे महाराजाओं,महारानियो की रंगीन मिजाजी,अजब गजब शौक,प्रेम कहानियों ,यूरोप अमेरिका के विलासी दौरों,राजसी जलसों, आलीशान पार्टियों के साथ साथ लेखक तत्कालीन भद्र समाज में व्याप्त बुराइयों का ईमानदारी से वर्णन करते हैं।

सतह के नीचे छिपी कई घिनौनी सच्चाइयों को सामने रखते हैं।।
पुस्तक में विभिन्न राजा,रानी व राजकुमारियों के सोलो व लेखक के साथ खिंचवाए गए चित्र दिए गए हैं जो विषयवस्तु समझने में पाठक के सहायक सिद्ध हुए हैं उस समय के रहन सहन व ठाट बाट को दर्शाती हैं।

“महारानी” पुस्तक पाठक को एक मिनट के लिए भी बोझिल नहीं करती बिना किसी व्यर्थ महिमा मंडन किसी भी घटनाक्रम को अनावश्यक नहीं खींचा गया है।
कह सकते हैं की दीवान जर्मनी दास ने लेखन धर्म के साथ पूर्ण न्याय किया है।

पुस्तक “महारानी” को “हिन्द पॉकेट बुक्स” ने प्रकाशित किया है जिसका मूल्य 150 रू रखा गया है। ऑन्लाइन प्लेटफॉर्म से प्राप्त कर सकते हैं व नजदीकी पुस्तक विक्रेता से भी साधारण से मूल्य में बहुत अच्छी व ज्ञान वर्धक सामग्री है जो निराश नहीं करेगी।

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धन्यवाद

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