Animal farm summary । जॉर्ज ऑरवेल । पशुओं की क्रांति

Animal farm summary । जॉर्ज ऑरवेल । पशुओं की क्रांति

लेखक परिचय

जॉर्ज ऑरवेल जिनका मूल नाम एरिक आर्थर ब्लेयर था इनका जन्म बिहार के मोतिहारी नामक स्थान पर सन 12 जून 1903 को हुआ था।

जॉर्ज के पिता अंग्रेजी राज की सिविल सेवा के अधिकारी थे।जन्म के सालभर बाद ये अपनी मां के साथ इंग्लैंड चले गए उनकी शिक्षा दीक्षा वहीं पर हुई।

इन्होंने फासीवाद के खिलाफ स्पेन के गृहयुद्ध में भी भाग लिया उन्होंने बीबीसी के लिए भी काम किया था और लोकतांत्रिक समाजवाद के कट्टर पैरोकार थे।

उपन्यास परिचय

एनिमल फार्म महान अंग्रेजी उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल की बीसवीं सदी की कालजयी रचना है एनिमल फॉर्म में जॉर्ज ऑरवेल ने सूअरों को मुख्य पात्रों के रूप में रखकर रूस की बोल्शेविक क्रांति की विफलता पर बहुत ही बहुत ही करारा व्यंग्य किया था।

एनिमल फॉर्म लघु उपन्यास की श्रेणी में आता है और आज भी उतना ही चर्चित और असरदार है।

यह 1970 की रूसी क्रांति में घटित घटनाओं का एक राजनीतिक नाटकीय रूपांतरण है क्योंकि तब स्टालिन ने सोवियत संघ की सत्ता प्राप्त की थी।

उपन्यास में लियोन त्रोत्सकी और जोसेफ स्टालिन को सूअरों के रूप में दिखाया है जो अपने फार्म के अन्य निवासी पशुओं को साथ लेकर मार्क्स के कम्युनिज्म के आदर्शों को साकार रूप देने की कोशिश करते हैं।

स्टालिन(नेपोलियन) और लियोन त्रोत्सकी(स्नोबॉल)

नेपोलियन पशुफार्म पर अपनी सत्ता स्थापित करने के बाद जल्द ही स्नोबॉल को फार्म छोड़कर भागने पर मजबूर कर देता है।
अपनी सत्ता और शक्ति बनाए रखने के लिए हर गलत काम के लिए स्नोबॉल को ही जिम्मेदार ठहरा जाता है और फार्म के हर पशु के मन में उसके प्रति नफरत फैलाई जाती है।

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यह उपन्यास रूस में साम्यवादी आंदोलन के दौरान आए भ्रष्टाचार और विरोधाभासों को निर्दयता से बयान करता है कि किस तरह आंदोलन का नेतृत्व करने वालों के स्वार्थ,लालच और वैचारिक विरोधाभासी नीतियां उन्हें लक्ष्यों से भटका कर आत्मपरक कर देती हैं।

जिन आदर्शों के नाम पर आंदोलन किया गया था….किस तरह उन मूल आदर्शों पार्टी के साथ सुखी साम्यवादी समाज के सपने को खंड खंड कर देती है

 

जिस सर्वहारा वर्ग को सत्ता दिलवाने के लिए यह क्रांति की गई थी मुक्ति आंदोलन के नाम से आगे चलकर वह आंदोलन अपने मूल उद्देश्यों से भटक कर एक त्रासदी बन जाता है।

समाजवाद के विरोधाभास

कार्ल मार्क्स के सिद्धांतों पर चलते हुए वामपंथी नेताओं ने रूस को नया रूप देने का प्रयास किया
पूंजीवाद के विपरीत साम्यवाद को स्थापित करने के संघर्ष के दौरान अगुआ नेताओं के कार्य व्यवहार और नीतिनिर्माण में बहुत से विरोधभास दिखने लगे थे लेकिन स्टालिन की तानाशाही के चलते आमजनता किस तरह उसके हर हुक्म को मानने के लिए बाध्य थी यह इस उपन्यास में बड़े ही नाटकीय तरीके से दिखाया गया है।

पूंजीवाद की बुराईयों को दूर कर देश व समाज में सभी को समान अवसर व संसाधन देने के वायदे किए गए लेकिन धीरे धीरे उच्च नेतृत्व खुद पूंजीवादी विचारधारा में ढलने लगते हैं आमजन फिर से उन्ही समस्याओं से जूझने लगता है जिन्हें दूर करने का वायदा उनसे बार बार किया गया था।

Animal farm summary । जॉर्ज ऑरवेल

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क्रांति के अगुआ धीरे धीरे स्वंय धन संसाधनों पर आधिपत्य जमाने लगते हैं और विरोध में उठने वाली हर छोटी बड़ी आवाज को निर्दयता से कुचल दिया जाता है।
चारों तरफ भय और संदेह का वातावरण पैदा हो जाता है और जनता के मन में विरोधी विचारों के प्रति नफरत फैलाई जाती है

किस तरह एक नई विचारधारा कुछ समय बाद बिल्कुल उन्हीं दुर्गुणों को अपना लेती है जिनके खिलाफ कभी उन्होंने मरते दम तक लड़ने का संकल्प लिया था।

सारांश

यह ऑरवेल द्वारा पशुओं के बाड़े के “पशुवाद” के रूप में रूस में घटी 19 अगस्त 1940 की घटनाओं का रोमांचक प्रतिकीकरण है और साम्यवादी विचारधारा और इसके प्रतिनिधि स्टॅलिन जैसे नेताओं की तानाशाही का सटीक चित्रण किया गया है।

 

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